आरती की रस्म का समय

आरती श्री सांवलिया जी की

  • ॐ जय श्री सांवल देव हरे, स्वामी जय श्री सांवल देव हरे। भक्त जनों के कष्ट, क्षमा में दूर करो ॥ ॐ आरती सांवल...
  • मातु कटुक के मारे, भीमाभय चारों। स्वामी... मेरे सुख दीन दुखी, दीन दुःखहर करो ॥ ॐ आरती सांवल...
  • जी होष्ट पातु पत्ते, दुख विपत्ति तन का। स्वामी... गृह शत्रु दुःख हरति, बालक दूर करो ॥ ॐ आरती सांवल...
  • श्याम चरण तले, वैराग्य ध्यानवन। स्वामी... दीनन को दीन दयाल, संकट सब दूर करो ॥ ॐ आरती सांवल...
  • नयन निरखता, तारुण, शरण करो देवा। स्वामी... रखि शरण में अपने, दुःखकुल लगा यो ॥ ॐ आरती सांवल...
  • मस्तक मुकुट विराज, मुख चंद्र सोहे। स्वामी... लौवन ललित लोलान, भक्तिन करसो ॥ ॐ आरती सांवल...
  • नीलम केसरिया वेश, पीतांबर सुंदर। स्वामी... चंदन तिलक सोहे, मन हरषायो ॥ ॐ आरती सांवल...
  • चरण कमल की धूल, जगत हितकारी। स्वामी... श्री सांवलिया जी की आरती जो कोई नर गावे। स्वामी... सुख संपत्ति घर आवे, मन वांछित फल पावे ॥ ॐ आरती सांवल...
  • शालाकार भुजमध्यं वज्रनायं सुरेशम्। विद्यावारं गगनमध्यं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥ लक्ष्मीमाध्यं कमलनयनं सोमसिंह धूपीनकम्। वन्दे विष्णुं कमलहस्तं सर्वलोकैकनाथम्॥